भारत स्वाभिमान आन्दोलन सामग्री
हम वन्दे है प्यार के मांगे सबकी खैर, अपनी सबसे दोस्ती नहीं किसी से बैर !
ॐ
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परम पूज्य महाराज श्री के निर्देशन में अगस्त क्रांति २०१२ के अहिंसक आन्दोलन हेतु आन्दोलन सामग्री उपलब्ध है !
हमारा उद्देश्य अपने उन दिग्भ्रमित और आलसी भाईयो को सही मार्ग पर लाना है जो अपने ही देश को लूट रहे और लुटवा रहे है !
यह आन्दोलन किसी विदेश ताकत के खिलाफ नहीं है, यह आन्दोलन अपने ही मूढ़ भाईयो की मूढ़ता से निजात दिलाने हेतु है !
हम वह सब कुछ करेगें जो अपने ही मूढ़ भाई की मूढ़ता को ठीक करने के लिए अवश्यक है !
संग्रहित आन्दोलन सामग्री के लिए हम उन सभी ज्ञात और अज्ञात स्रोतों के आभारी है !
सम्पर्क सूत्र :- 08954890164
परम पूज्य महाराज श्री के निर्देशन में अगस्त क्रांति २०१२ के अहिंसक आन्दोलन हेतु आन्दोलन सामग्री उपलब्ध है !
हमारा उद्देश्य अपने उन दिग्भ्रमित और आलसी भाईयो को सही मार्ग पर लाना है जो अपने ही देश को लूट रहे और लुटवा रहे है !
यह आन्दोलन किसी विदेश ताकत के खिलाफ नहीं है, यह आन्दोलन अपने ही मूढ़ भाईयो की मूढ़ता से निजात दिलाने हेतु है !
हम वह सब कुछ करेगें जो अपने ही मूढ़ भाई की मूढ़ता को ठीक करने के लिए अवश्यक है !
संग्रहित आन्दोलन सामग्री के लिए हम उन सभी ज्ञात और अज्ञात स्रोतों के आभारी है !
सम्पर्क सूत्र :- 08954890164
Monday, 30 July 2012
Sunday, 29 July 2012
डा. हरिओम पंवार
जाने माने कवि डा. हरिओम पंवार।
मैं भी गीत सुनाता हूँ, शबनम के अभिनन्दन के
मैं भी ताज पहनता हूँ नंदन वन के चन्दन के ||
लेकिन जब तक पगडण्डी से संसद तक कोलाहल है
तब तक केवल गीत लिखूंगा जन गन मन के क्रंदन के ||
जब पंछी के पंखो पर हो पहरे बम के गोली के,
जब पिंजरे में कैद पड़े हो सुर कोयल की बोली के ||
जब धरती के दामन पर हो दाग लहू की होली के,
कोई कैसे गीत सुना दे बिंदिया कुमकुम रोली के ||
मैं झोपड़ियों का चारण हूँ आंसू गाने आया हूँ
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
अन्धकार में समां गए जो तूफानों के बीच जले,
मंजिल उनको मिली कभी जो चार कदम भी नहीं चले||
क्रांतिकथा में गौण पड़े है, गुमनामी की बाहों में,
गुंडे तस्कर तने खड़े है राजमहल की राहों में ||
यहाँ शहीदों की पावन गाथाओं को अपमान मिला,
डाकू ने खादी पहनी तो संसद में सम्मान मिला ||
राजनीति में लोह पुरुष जैसा सरदार नहीं मिलता,
लाल बहादुर जी जैसा कोई किरदार नहीं मिलता ||
ऐरे गेरे नत्थू खैरे तंत्री बन कर बैठे है,
जिनको जेलों में होना था मंत्री बन कर बैठे है ||
लोक तंत्र का मंदिर भी बाज़ार बना कर डाल दिया,
कोई मछली बिकने का बाज़ार बना कर डाल दिया ||
अब जनता को संसद भी प्रपंच दिखाई देती है,
नौटंकी करने वालों का मंच दिखाई देती है ||
पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे
,इतिहासों के पन्नो में वे सब कायर कहलायेगे ||
कहाँ बनेंगे मंदिर मस्जिद कहाँ बनेगी राजधानी,
मंडल और कमंडल पी गए सबकी आँखों का पानी ||
प्यार सिखाने वाले बस ये मजहब के स्कूल गए,
इस दुर्घटना में हम अपना देश बनाना भूल गए ||
कहीं बमों की गर्म हवा है और कहीं त्रिशूल जले,
सांझ चिरैया सूली टंग गयी पंछी गाना भूल गए ||
आँख खुली तो पूरा भारत नाखूनों से त्रस्त मिला,
जिसको जिम्मेदारी दी वो घर भरने में व्यस्त मिला ||
क्या यही सपना देखा था भगत सिंह की फ़ासी ने,
जागो राजघाट के गाँधी तुम्हे जगाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
जो अच्छे सच्चे नेता है उन सबका अभिनन्दन है,
उनको सौ सौ बार नमन है मन प्राणों से वंदन है ||
जो सच्चे मन से भारत माँ की सेवा करते है,
हम उनके कदमो में अपने प्राणों को धरते है ||
लेकिन जो कुर्सी के भूखे दौलत के दीवाने है,
सात समुंदर पार तिजोरी में जिनके तहखाने है ||
जिनकी प्यास महासागर है भूख हिमालय पर्वत है,
लालच पूरा नीलगगन है दो कौड़ी की इज्ज्ज़त है ||
इनके कारण ही बनते है अपराधी भोले भाले,
वीरप्पन पैदा करते है नेता और पुलिस वाले ||
केवल सौ दिन को सिंघासन मेरे हाथों में दे दो,
काला धन वापस न आये तो मुझको फ़ाँसी दे दो ||
जब कोयल की डोली गिद्धों के घर में आ जाती है,
तो बगला भगतो की टोली हंसों को खा जाती है ||
जब जब जयचंदो का अभिनन्दन होने लगता है,
तब तब सापों के बंधन में चन्दन रोने लगता है ||
जब फूलों को तितली भी हत्यारी लगने लगती है,
तो माँ की अर्थी बेटों को भारी लगने लगती है ||
जब जुगनू के घर सूरज के घोड़े सोने लगते है,
तो केवल चुल्लू भर पानी सागर होने लगते है ||
सिंहो को म्याऊँ कह दे क्या ये ताकत बिल्ली में है,
बिल्ली में क्या ताकत होती कायरता दिल्ली में है ||
कहते है की सच बोलो तो प्राण गवाने पड़ते है,
मैं भी सच्चाई को गाकर शीश कटाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
कोई साधू संन्यासी पर तलवारे लटकाता है,
काले धन की केवल चर्चा पर भी आँख चढ़ाता है ||
कोई हिमालय ताजमहल का सौदा करने लगता है,
कोई यमुना गंगा अपने घर में भरने लगता है ||
कोई तिरंगे झंडे को फाड़े फूके आज़ादी है,
कोई गाँधी को भी गाली देने का अपराधी है ||
कोई चाकू घोप रहा है संविधान के सीने में,
कोई चुगली भेज रहा है मक्का और मदीने में ||
कोई ढाँचे का गिरना UNO में ले जाता है,
कोई भारत माँ को डायन की गाली दे जाता है ||
कोई अपनी संस्कृति में आग लगाने लगता है,
कोई बाबा रामदेव पर दाग लगाने लगता है ||
सौ गाली पूरी होते ही शिशुपाल कट जाते है,
तुम भी गाली गिनते रहना जोड़ सिखाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ |
मैं भी गीत सुनाता हूँ, शबनम के अभिनन्दन के
मैं भी ताज पहनता हूँ नंदन वन के चन्दन के ||
लेकिन जब तक पगडण्डी से संसद तक कोलाहल है
तब तक केवल गीत लिखूंगा जन गन मन के क्रंदन के ||
जब पंछी के पंखो पर हो पहरे बम के गोली के,
जब पिंजरे में कैद पड़े हो सुर कोयल की बोली के ||
जब धरती के दामन पर हो दाग लहू की होली के,
कोई कैसे गीत सुना दे बिंदिया कुमकुम रोली के ||
मैं झोपड़ियों का चारण हूँ आंसू गाने आया हूँ
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
अन्धकार में समां गए जो तूफानों के बीच जले,
मंजिल उनको मिली कभी जो चार कदम भी नहीं चले||
क्रांतिकथा में गौण पड़े है, गुमनामी की बाहों में,
गुंडे तस्कर तने खड़े है राजमहल की राहों में ||
यहाँ शहीदों की पावन गाथाओं को अपमान मिला,
डाकू ने खादी पहनी तो संसद में सम्मान मिला ||
राजनीति में लोह पुरुष जैसा सरदार नहीं मिलता,
लाल बहादुर जी जैसा कोई किरदार नहीं मिलता ||
ऐरे गेरे नत्थू खैरे तंत्री बन कर बैठे है,
जिनको जेलों में होना था मंत्री बन कर बैठे है ||
लोक तंत्र का मंदिर भी बाज़ार बना कर डाल दिया,
कोई मछली बिकने का बाज़ार बना कर डाल दिया ||
अब जनता को संसद भी प्रपंच दिखाई देती है,
नौटंकी करने वालों का मंच दिखाई देती है ||
पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जायेंगे
,इतिहासों के पन्नो में वे सब कायर कहलायेगे ||
कहाँ बनेंगे मंदिर मस्जिद कहाँ बनेगी राजधानी,
मंडल और कमंडल पी गए सबकी आँखों का पानी ||
प्यार सिखाने वाले बस ये मजहब के स्कूल गए,
इस दुर्घटना में हम अपना देश बनाना भूल गए ||
कहीं बमों की गर्म हवा है और कहीं त्रिशूल जले,
सांझ चिरैया सूली टंग गयी पंछी गाना भूल गए ||
आँख खुली तो पूरा भारत नाखूनों से त्रस्त मिला,
जिसको जिम्मेदारी दी वो घर भरने में व्यस्त मिला ||
क्या यही सपना देखा था भगत सिंह की फ़ासी ने,
जागो राजघाट के गाँधी तुम्हे जगाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
जो अच्छे सच्चे नेता है उन सबका अभिनन्दन है,
उनको सौ सौ बार नमन है मन प्राणों से वंदन है ||
जो सच्चे मन से भारत माँ की सेवा करते है,
हम उनके कदमो में अपने प्राणों को धरते है ||
लेकिन जो कुर्सी के भूखे दौलत के दीवाने है,
सात समुंदर पार तिजोरी में जिनके तहखाने है ||
जिनकी प्यास महासागर है भूख हिमालय पर्वत है,
लालच पूरा नीलगगन है दो कौड़ी की इज्ज्ज़त है ||
इनके कारण ही बनते है अपराधी भोले भाले,
वीरप्पन पैदा करते है नेता और पुलिस वाले ||
केवल सौ दिन को सिंघासन मेरे हाथों में दे दो,
काला धन वापस न आये तो मुझको फ़ाँसी दे दो ||
जब कोयल की डोली गिद्धों के घर में आ जाती है,
तो बगला भगतो की टोली हंसों को खा जाती है ||
जब जब जयचंदो का अभिनन्दन होने लगता है,
तब तब सापों के बंधन में चन्दन रोने लगता है ||
जब फूलों को तितली भी हत्यारी लगने लगती है,
तो माँ की अर्थी बेटों को भारी लगने लगती है ||
जब जुगनू के घर सूरज के घोड़े सोने लगते है,
तो केवल चुल्लू भर पानी सागर होने लगते है ||
सिंहो को म्याऊँ कह दे क्या ये ताकत बिल्ली में है,
बिल्ली में क्या ताकत होती कायरता दिल्ली में है ||
कहते है की सच बोलो तो प्राण गवाने पड़ते है,
मैं भी सच्चाई को गाकर शीश कटाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ ||
कोई साधू संन्यासी पर तलवारे लटकाता है,
काले धन की केवल चर्चा पर भी आँख चढ़ाता है ||
कोई हिमालय ताजमहल का सौदा करने लगता है,
कोई यमुना गंगा अपने घर में भरने लगता है ||
कोई तिरंगे झंडे को फाड़े फूके आज़ादी है,
कोई गाँधी को भी गाली देने का अपराधी है ||
कोई चाकू घोप रहा है संविधान के सीने में,
कोई चुगली भेज रहा है मक्का और मदीने में ||
कोई ढाँचे का गिरना UNO में ले जाता है,
कोई भारत माँ को डायन की गाली दे जाता है ||
कोई अपनी संस्कृति में आग लगाने लगता है,
कोई बाबा रामदेव पर दाग लगाने लगता है ||
सौ गाली पूरी होते ही शिशुपाल कट जाते है,
तुम भी गाली गिनते रहना जोड़ सिखाने आया हूँ,
घायल भारत माता की तस्वीर दिखाने लाया हूँ |
Wednesday, 4 July 2012
आचार्य बालकिशन नहीं असली गुनाहगार तो कांग्रेसी है,...
TISARIKARNTI: आचार्य बालकिशन नहीं असली गुनाहगार तो कांग्रेसी है,...: आचार्य बालकिशन नहीं असली गुनाहगार तो कांग्रेसी है,, आइये आपको सच्चाई बताते है की कोंग्रेस ने ऐसे लोगो को अपना सांसद बनाया है जिनपर हत्याओं...
बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण पर सीबीआई का शिकंजा धीरे-धीरे कसता चला जा रहा है। सीबीआई ने बालकृष्ण के खिलाफ धारा 420 (ठगी), 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज किया है। उनके खिलाफ फर्जी डिग्री और भारतीय पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के उल्लंघन के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। बालकृष्ण को लेकर जिस तरह से सीबीआई की तेजी और फुर्ती वाकया ही काबिले तारीफ कहा जा सकता है। लेकिन अधिकतर मामलों को सालों-साल टालने वाली सीबीआई में अचानक आई फुर्ती की वजह किसी से छिपी नहीं है।
कालेधन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को घेरने की मुहिम के मुखिया बाबा रामदेव के दाहिने हाथ माने जाने वाले बालकृष्ण पर सीबीआई का शिकंजा लगभग कस चुका है। सूत्रों की माने तो सीबीआई कभी भी उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। हालांकि बालकृष्ण अण्डर ग्राउण्ड चल रहे हैं और बालकृष्ण के अंगरक्षक जयेंद्र सिंह असवाल ने हरिद्वार के कनखल थाने में उनकी गुमशुदगी की रपट दर्ज कराई है। लेकिन जो तेजी और कार्य कुशलता सीबीआई बालकृष्ण के मामले में दिखा रही है, उसी से कहीं ज्यादा गंभीर आरोप असम से कांग्रेस के पूर्व सांसद एम. के. सुब्बा पर हैं। कांग्रेसी सांसद सुब्बा की भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाते हुए सीबीआई चार्जशीट तक दायर कर चुकी है। इसके बावजूद सिर्फ एफआईआर के बाद बालकृष्ण का पासपोर्ट रद्द कराने पर आमदा सीबीआई ने सुब्बा का पासपोर्ट रद्द कराने की कोई कोशिश नहीं की है। इससे सीबीआई ने साबित कर दिया है कि वह स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के इशारे पर काम करने वाला संगठन है।
गौरतलब है कि काले धन और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर केंद्र की संप्रग सरकार को योग गुरू रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने बड़े जोर-शोर से घेरा था। 4-5 जून की रात को बाबा रामदेव और उनके सर्मथकों पर डंडे बरसाकर संप्रग सरकार खुद को फ्रंटफुट पर मान रही है। बाबा रामदेव के उठाए सवालों का जवाब और कोई कार्रवाई करने की बजाय कांग्रेस ने ये ठान लिया कि वो रामदेव को भी अपने स्तर पर लाकर ही दम लेगी अर्थात उन्हें और उनके सहयोगियों को भी भ्रष्ट साबित करके छोड़ेगी। इसी कड़ी में रामदेव और बालकृष्ण पर सरकार की नजरें टेढ़ी हैं। लेकिन नागरिकता, फर्जी डिग्रियों संबंधी जो भी केस बालकृष्ण पर दर्ज करके सीबीआई उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी कर दिया है और विदेश मंत्रालय से बालकृष्ण के पासपोर्ट को रद्द करने की मांग की है, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि सीबीआई किसी दबाव या इशारे पर काम कर रही है।
नागरिकता के मामले में बालकृष्ण से कहीं ज्यादा गंभीर आरोप असम से कांग्रेस के पूर्व सांसद एम. के. सुब्बा पर हैं। कांग्रेसी सांसद सुब्बा की भारतीय नागरिकता पर सवाल उठाते हुए सीबीआई चार्जशीट तक दायर कर चुकी है। इसके बावजूद सिर्फ एफआईआर के बाद बालकृष्ण का पासपोर्ट रद्द कराने पर आमदा सीबीआई ने सुब्बा का पासपोर्ट रद्द कराने की कोई कोशिश नहीं की है। सीबीआई की चार्जशीट के बावजूद सुब्बा न सिर्फ अपना बिजनेस आराम से चला रहे हैं, बल्कि एक पूर्व सांसद को मिलने वाले सुविधाओं का लाभ भी ले रहा है। इस मामले में सीबीआई का दोहरापन इस बात से भी साफ हो जाता है कि बालकृष्ण के फर्जी पासपोर्ट में तत्काल कार्रवाई शुरू हो गई लेकिन सुब्बा के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में एक दशक से भी ज्यादा समय लग गया। लंबे समय तक सुब्बा के मामले में निष्क्रिय रहने पर सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गंभीरता से जांच शुरू करनी पड़ी। बाद में अदालत के निर्देश पर ही उसने चार्जशीट भी दाखिल की।
सीबीआई ने अभी तक बालकृष्ण की भारतीय नागरिकता पर उंगली नहीं उठाई है। उनपर केवल पासपोर्ट ऑफिस में जमा की गई शैक्षिक डिग्रियों के फर्जी होने के प्रमाण हैं। यहां सवाल यह नहीं है कि सीबीआई बालकृष्ण के पीछे क्यों पड़ी है, हां अगर बालकृष्ण ने सच्चाई को छुपाया है या दस्तावेजों से हेराफेरी करके पासपोर्ट या अन्य सुविधाएं प्राप्त की हैं तो उन पर कार्रवाई अवश्य होनी चाहिए। लेकिन इन सब के बीच एक बात जो अखरती है वो यह है कि क्या केवल बालकृष्ण ही एकमात्र ऐसे गुनाहगार हैं। नागरिकता के मामले से लेकर फजी पासपोर्ट के कई अन्य मामले सरकार के संज्ञान में है लेकिन उन केसों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती, ऐसे हालातों में ये लगता है कि सरकार जान बूझकर कानून की आड़ लेकर निजी स्वार्थ, खुन्नस और बदला लेने की भावना से बालकृष्ण के विरूद्व कार्रवाई करवा रही है।
सीबीआई का चाहे जितनी बार स्वतंत्र जांच एजेंसी का तमगा दिया जाए लेकिन उसकी कार्यशैली और व्यवहार हर बार यही सिद्व करता है कि वो दिल्ली की गद्दी काबिज दल की गुलाम से अधिक नहीं है। पीएम और गृहमंत्री के इशारे पर सीबीआई हर मामले को अंजाम देती है और अगर ऊपर से हरी झंडी नहीं है तो संगीन से संगीन मामलों में जानबूझकर देरी और लटकाने का रवैया अपनाया जाता है। आज संप्रग सरकार के सबसे धड़े कांग्रेस के पूर्व सांसद सुब्बा के मामले को जिस तरह से सीबीआई दबा कर बैठी है, उससे यही प्रतीत होता है कि बिना सरकार के इशारे के स्वतंत्र जांच एजेंसी का दम ठोंकने वाली सीबीआई दो कदम चलने को मोहताज है। बात तो तब है जब सीबीआई या अन्य जांच एजेंसिया छोटे-बडे़, अपने-पराये, अमीर-गरीब में बिना किसी भेदभाव के निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई करें। विपक्ष वैसे भी सीबीआई को कांग्रेस ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टीगेशन ही कहता है। अगर बालकृष्ण दोषी हैं तो उन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए लेकिन वहीं सीबीआई के पास पेडिंग पड़े मामलों को इसी तत्परता से निपटाए तो अपराधियों का हौंसला गिरेगा और आम आदमी का पुलिस-प्रशासन पर भरोसा बढे़गा।
[B]लेखक डा. आशीष वशिष्ठ लखनऊ में स्वतंत्र पत्रकार हैं.[/B]
Tuesday, 3 July 2012
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